अखाड़े (Akhadas)
आदिगुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़ों का निर्माण कराया था। शुरुआत के दिनों में सिर्फ 4 अखाड़े ही अस्तित्व में थे लेकिन बाद में विचारों में भिन्नता और मान्याताओं के आधार पर कई अखाड़े अस्तित्व में आए। वर्तमान में मुख्यतः कुल 13 अखाड़े मौजूद हैं जो उनके इष्ट देवता के आधार पर मुख्य तौर पर तीन श्रेणियों में विभाजित है।
शैव(दशनामी) अखाड़ा
- निरंजनी अखाड़ा
- जूना अखाड़ा
- महानिर्वाणी अखाड़ा
- अटल अखाड़ा
- आह्वान अखाड़ा
- आनंद अखाड़ा
- पंचाग्नि अखाड़ा
वैष्णव अखाड़ा
- दिगंबर अखाड़ा
- निर्वाणी अखाड़ा
- निर्मोही अखाड़ा
उदासीन अखाड़ा
- उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा
- उदासीन नया अखाड़ा
- निर्मल पंचायती अखाड़ा
हाल के वर्षों में समाज के बदलते स्वरूप और समावेशी सोच के चलते कुछ नए अखाड़ों की स्थापना हुई है:
किन्नर अखाड़ा
2015 में स्थापित, यह अखाड़ा किन्नर समुदाय (LGBTQIA+) व ट्रांसजेंडर समुदाय और समलैंगिक साधु-साध्वियों से संबंधित साधुओं और साध्वियों के लिए बनाया गया है।
परी अखाड़ा
एक नवाचारात्मक समूह, जो महिलाओं, पर्यावरण प्रेमियों और बहिष्कृत वर्गों को शामिल करता है।
हालांकि इन्हें अभी तक परिषद की औपचारिक मान्यता नहीं मिली है, परंतु इनका आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व निरंतर बढ़ रहा है।
13 पारंपरिक और 2 नवीन अखाड़ों को मिलाकर कुल 15 अखाड़ों में से सभी अखाड़े नागा साधु नहीं बनाते बल्कि उनमें से केवल 7 ही ऐसे अखाड़े हैं जो नागा सन्यासियों को तैयार करते हैं उन्हें प्रशिक्षण देते हैं।
ये 7 अखाड़े निम्नलिखित हैं:
- जूना अखाड़ा
- महानिर्वाणी अखाड़ा
- निरंजनी अखाड़ा
- अटल अखाड़ा
- पंचाग्नि अखाड़ा
- आनंद अखाड़ा
- आह्वान अखाड़ा
अखाड़ा और नागा साधु एक दूसरे के पूरक हैं। इनके संबंध को आप ऐसा समझ सकते हैं जैसे एक फूलों की माला में फूल और धागे के बीच का संबंध होता है। एक-दूसरे के बिना इसकी महत्ता कम हो जाएगी।